Tuesday, June 25, 2024
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अब्राहम लिंकन के जीवन एवं उपलब्धियों/All achievements or introduction about Abraham lincoln

अब्राहम लिंकन  के जीवन एवं उपलब्धियों का वर्णन करे। 

 



                                                  


                                                                अब्राहम लिंकन 








  अब्राहम लिंकन  इलियन के एक साधारण वकील थे।  1860 ईस्वी तक अमेरिका के अबौत काम लोग उन्हें जानते थे।  रिपब्लिक दल में भी उन्हें कोई महत्वा महत्वपूर्ण पद प्राप्त नहीं था।  किसी यह अनुमान भी नहीं लगाया थे की एक दिन वे राष्ट्रपति बनेंगे।  स्टीफन डगलस के साथ वहनव के दौरान उनकी प्रखर बुद्धि।  देशप्रेम तथ प्रजातंत्र के प्रति  उनके दृष्टिकोणों को लोगो देखा।  दोनों लोगो के मध्य राष्ट्रिय समस्याओं  पर वादविवाद के समय लीकन राष्ट्रिय मंच पर नेता के रूप में उभरे।  राष्ट्र ने धीरेधीरे उनकी दूरदर्शिता।  राष्ट्र के पार्टी अगाध निष्ठां, उनकी विनयशीलता एवं उनके अपूर्व धैर्य को पहचना।


1860 ईस्वी   के चुनाव में लिंकन  की विजय ने अमेरिकी जनता को विस्मित कर दिया।  अत्यंत विषम स्तिथि में वे राष्ट्रपति आने।  एक इतिहासकार में शब्दों में ”Lincoln’s life is a story stunning in its simplicity.” इस चुनाव में लिंकन  को लोगो ने एक स्पष्ट वक्ता एवं उदेश्यों  के प्रति समर्पित मनुष्य के रूप में जान।  उन्हें राष्ट्र एवं प्रजातंत्र का मसीहा मना  जाने लगा। 

 कठिनाइयों के समय देश को उबारने एवं ऐसे विखंडित होने से बचाने  का श्रेय ाबरहम लिंकन  को जाता है राष्ट्रपति के रूप में लिंकन को भूमिका हम निम्न प्रकार दे सकते है। 



1. राष्ट्रीपति की शक्तियों का वयपक प्रयोग (Wide use of Presidential  Powers):


हालाँकि लीकन संविधान के पार्टी पूरी तरह से निष्ठावान थे लेकिन अनेक अवसरों पर उन्होंने कांग्रेस और न्यायालयो के अधिकारों की उपेक्षा कर अपनी शक्तियों का स्वेच्छापूर्वक प्रयोग किया।  इसका कारन यह था कि  युद्धकाल में त्वरित कार्वाही  उन्होंने ऐसे कार्य स्वतः कर लिए जो सामान्य स्थिति में कांग्रेस  या न्यायालयों द्वारा किये जाने थे।  उदाहरणस्वरूप सुमतर  के पतन और जुलाई1861 ईस्वी में कांग्रेस के विशेष अधिवेशन के बिच के तीन महीनो में लीकन ने निम्नलिखित कार्य किये :-


(i)  सैनिक भर्तीउन्हीने स्वाधिकार से लोगो को सेना में भर्ती किया।

(ii) नियमित सेनाउन्होंने नियमित सेना का भी विस्तार किया।

(iii) अनुमति के बिना व्यय : कांग्रेस की स्वीकृति के बिना लीकन ने धन खर्च किये।


(iv) सैनिक अदालतों का गठन : गैरसैनिक पर मुकदमा चलने के लिए उन्होंने सैनिक अदालतों का प्रयोग किये।  इसके पीछे यह तर्क था कीसेना छोड़कर भाग आने वाले सीधेसीधे सैनिक को तो में गोली मर दूँ पर क्या उन सेनिको को सेना छोड़ कर भागने के लिए उकसाने वाले धूर्त और मक्कार आदमी को छोड़ दूँ।


   2 . दासपार्था को समाप्त करना ( Abolition of Slavery) :


 दासपार्था को ख़तम करने का प्रयास लीकन ने किया।  इस समस्या ने उत्तर तथा दक्षिण के लोगो के मध्य भरी अशांति पैदा कर दी थी।  उन्हीने कहा किसरकार  आधे गुलाम और आधे स्वतंत्र  लोगो को रखकर स्थायी नहीं रह सकती।  ” लीकन गुलामी की प्रथा  को समाप्त करने के कटटर समर्थक नहीं थे और वह दक्षिण  राज्यों में विधमान दासप्रथा  के मामले में हस्तक्षेप नहीं चाहते थे।  वह चाहते थे कि  पार्था  का अंत धीरेधीरे  सवतः ही हो जाए।  वे इस कार्य का समाधान  हिंसा से नहीं करना चाहते थे।  उनका कहने था कि  दासो  को स्तिथि  सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए।  उनका विचार था की यदि उत्तरी राज्यों ने आक्रमाक  रवैया अपनाया और दक्षिण राज्यों के दस स्वामियों के पार्टी तीव्र भर्त्सना की निति अपनायी गयी तो दस समस्या का शांतिपूर्ण समाधान नहीं हो पायेगा। 


युद्द प्ररम्भ  होने पर उत्तर के लोग अनुभव करने लगे कि  इस युद्ध की स्तिथि के दौरान इस गैरलोकतांत्रिक  प्रथा का अंत कर देना चाहिए। 22  सितम्बर 1862  ईस्वी को अमेरिका को  सेनाध्यक्ष के रूप में लिंकन ने घोषणा की कि  ” उस हर राज्य के किसी विशिष्ट भाग , जिसके निवासी उस दिन अमेरिका के विरुद्ध विरोह क्र रहे होंगे, में राणे वाले जो गुलाम है वे सब 1 जनवरी 1863 ईस्वी को स्वतंत्र को जायेगे और आगे वे सदैव स्वतंत्र रहेंगे।

यह घोषणा दक्षिण के राज्यों पर लागु होती थी जिन्होंने विद्रोह किया था।  अन्य राज्यों में गुलाम प्रथा की समाप्ति 1865  ईस्वी में तेहरहवें  संशोधन द्वारा हुई।

 

3 . यूनियन की रक्षा   (Protection of the Union):

 

इस सफलता के उपलक्ष्य में उसे भरी प्रशंसा ,मिली।  इसी श्रेय के आधार पर उसे अमेरिका के इतिहास में एक उच्च स्थान मिला।  अगर अमेरिका दो कन्फेडरेशनो में विभक्त को जाता तो यह बात सिध्द  हो जाती कि  अमेरिका की सरकार स्वयं  को सगठित नहीं रख पायी।  लीकन ने गेटिसबर्ग  के भाषण में कहा कि  ” जहाँ  तक मेरा व्यक्तित्वगत प्रश्न है, ,मैं  इस सारे  झगड़े में केवल एक बात  को मूल मनाता हूँ  कि  यह सिध्द करना आवश्यक है कि लोकप्रिय सरकार कोई निकम्मी सरकार  नहीं होती। यह बात हमें सदैव  तय करनी  कि  क्या किसी स्वतंत्र देश  अल्पसख्यको  यह अधिकार होना चाहिए कि जब चाहे यब सरकार को  तोड़ दे। अगर हम असफल  रहते  है तो  उससे  यही सिद्ध होगा कि हम लोग में अपना शासन खुद चला सकने सकने की क्षमता नहीं है।

 

इस सम्बन्ध में लिंकन का विचार था कि वह लोकतंत्र को जनता का का, जनता द्वारा और जनता के लिए शासन मानता था। ”  कारणों  से लिंकन जनता  के  बिच  बहोत  लोकप्रिय एवं प्रमुख  में उभरा, ( America was declared to be indestructive union
of indestructive state. ‘Compact theory of union”)

 

4 . लिंकन  विदेश राज्यों के साथ सम्बन्ध (Foreign Relations):

 

जनमत  के महत्वा  अनुभव कराने  लिए  तथा यूनियन के पक्ष  ढंग से प्रस्तुत करने के लिए लिंकन  ने  अनेक पदाधिकारियों को ब्रिटेन भेजा।  गुलामी की मुक्ति की घोषणा करके उन्होंने यूरोप के  प्रमुख देशो की सहानुभूति प्रप्त की। यदि ब्रिटेन के विरुद्ध युद्ध की घोषणा  मांग की।  लिंकन  बड़ी ही बुद्धिमता  अमेरिका जनता को शांत किया अन्यथा युद्ध छिड़ सकता था।  इस प्रकार लिंकन ग्रेट ब्रिटेन को इस युद्ध में तटस्थ बनाये रखा।  फ्रांस अकेले इस मामले कोई कदम नहीं उठाना चाहता था।  अतः उसने भी तटस्थबनाये रखी। 

 

 

5. लिंकन का केबिनेट (Cabinet of Lincoln):

 

लिंकन निः स्वार्थी था।   आलोचना तथा विरोध सहने की शक्ति थी।  संकट के समय लिंकन  ऐसे कुछ व्यक्तियों को भी केबिनेट में स्थान दिया जो रेपुब्लिकन पार्टी का टिकट प्रप्त उसके प्रतिद्वेंदी थे उदाहरणतः उसने चेज   कबिनेट  शामिल किया। इसवीं एच।  स्टेनटन  सिवर्ड भी उसके केबिनेट में शामिल थे अपने व्यक्तिगत मतभेद को भुलाकर उसने योग्य व्यक्तियों की टीम बनायी थी जो देश के लिए सर्वाधिक हितकारी थी इसी प्रकार योग्य व्यक्तियों की टीम बनायीं थी जो देश  सर्वाधिक हितकारी थी।  इसी प्रकार योग्य सेनापति को अवसर  उसमे से सर्वश्रेठ सेनापति ग्रेंट को खिंच  लिया  युद्द की कार्यवाही  योजना नानने   उसे प्रयोग  उन्हें खुली छूट प्रदान की।  

अपने देश के प्रति  अगाध प्रेम तथा दक्षिण  द्वेष  आभाव लिंकन के विलक्षण व्यक्तित्व का हिस्सा था।  दूसरे बार पद ग्रहण करते समय  कहा 
किसी से भी द्वेष  होए सबके पार्टी उदार रा क्र सत्य पर दृढ़जैसा ईश्वर ने हमे सत्य को पहचनाने की शक्ति प्रदान की है, हमें उस  करने  प्रयत्न करना चाहिए, जो हमने हाथ  है।


 

कुल मिलाकर मुक्ति के उसके महान कार्यो  प्रशसन को ऐतिहासिक या युगांतकारी स्तिथि में पहुँचाया तह और राष्ट्रियपति की उपाधि को मक्तिदाता रूप में सम्मानित किया था।  लिंकन का दृश्टिकोण था की अशोक महँ की तरह पराजित शत्रु के साथ बेटों  की तरह व्यवहार  किया जाय कि स्थयी सत्रु के भाँती।  लिंकन  इन्ही कारणों से  महानतम राष्ट्रीयपति  बना   John Micolay  “He was beloved by his country men
because he was full embodiment of American life, American
aspiration.”       

                              

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