Tuesday, June 25, 2024
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शिवाजी, परिचय, मराठा शक्ति का उत्कर्ष (Introduction, The Rise of Maratha )

 

शिवजी का जन्म 6 अप्रैल, 1627 या 19 फ़रवरी, 1630 में शिवनेर के दुर्ग में हुआ था।  मराठो के पूर्वज राजस्थान के सिसोदिया वंश के सूर्यवंशी राजपूत थे, शिवाजी ने 1674 ईस्वी में राज्याभिषेक के बाद छत्रपति की उपाधि धारण की। रायगढ़ को उन्होंने अपनी राजधानी बनाया। उस युग के महान विद्वान बनारस के पंडित विश्वेश्वर उर्फ़ ‘ गंगाभट्ट’ ने उन्हें क्षत्रिय घोषित करते हुए उनका राज्याभिषेक कराया। 53 या 50 वर्ष की आयु में 1680 ईस्वी में शिवजी की मृत्यु हो गई। 
 
 
पिता – शाहजी 
माता -जीजाबाई 
गुरु – कोण्डदेव 
आधयात्मिक गुरु – रामदास 
पत्नी – तारा बाई (अन्य 7 पत्नियाँ भी थी )
अंतिम युद्ध कर्नाटक 
मृत्यु -12 अप्रैल, 1680 मृत्यु 
 
 
 
व्यक्तित्व – शिवाजी के अगर व्यक्तित्व की बात की जाये तो उनका व्यक्तित्व बहोत ही प्रभावी और आकर्षित रहा था क्योंकि अपने राजत्व और प्रशासनिक के क्षेत्र में किया गए कार्यों के कारण लोगों में उनका विश्वाश काफी हाड तक बढ़ चुका था और जन सम्पर्क शिवाजी का बहोत ही मजबुत बन चुका था जिसके कारण ही जन सहयोग उनको प्राप्त हुआ। जिसकी लोकप्रियता हमें आज वर्तमान समय में देखने को मिलती है। शिवाजी एक कुशल और प्रबुद्ध सम्राठ जाना जाते  है। 
 
 
 
मराठा शक्ति का उत्कर्ष – किसी एक व्यक्ति या विशेष व्यक्ति समूह का कार्य न था और न किसी विशेष समय में उत्पन्न हुई अस्थायी परिस्तिथियों का परिणाम था। मराठा शक्ति के उदय का आधार महाराष्ट्र के सम्पूर्ण निवासी थे, जिन्होंने जाति, भाषा, धर्म, साहित्य निवास – स्थान की एकता के आधार पर राष्ट्रीयता की भावना को जन्म दिया और उस राष्ट्रीयता को संगठित करने के लिए एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की इच्छा व्यक्त की।  महाराष्ट्र की भौगोलिक परिस्तिथिया भी मराठा शक्ति के उत्कर्ष में सहायक थी।  शिवाजी और अन्य मराठा नेताओं की उच्च नेतृत्व की क्षमता भी इसमें भागीदार थी। शिवाजी ने मुगलों को सलहार/ सल्हेर के युद्ध में हराया था अथवा इन्होंने जजिया कर  विरोध किया, अंतः औरंगजेब द्वारा राजा की उपाधि शिवाजी को दी गई। शिवाजी की प्रशासन में राज्य के आय का साधन भूमि से प्राप्त होने वाला कर  था, परन्तु  चौथ और सरदेशमुखी से भी कर/राजस्व वसूला जाता था।  जिसमें  चौथ‘ पड़ोसी राज्यों के  सुरक्षा करने के नाम से लिया जाता था शिवजी अपने राज्य के  मराठों से  सरदेशमुख लिया करते थे।  
 
 
धार्मिक नीति – शिवजी हिन्दू धर्म को मानने वाले शासक थे हिन्दुओं के शिक्षा, धार्मिक कर्मकांड में काफी छूट शिवाजी ने अपने समाज के लोगो को  दिया था परतुं मुस्लिम लोगो के लिए भी उनका व्यवहार काफी निम्न था शिवाजी के द्वारा कई मस्जिदों के निर्माण के अनुदान दिए गए अथवा उनके प्रशासनिक व्यवस्था मुस्लिम लोगों के लिए भी सामान्य हिन्दुओं की भाँति थी। अथवा उनके शासनकाल में मुसलमानों को अपने धर्म को मानने की पूरी स्वतंत्रता प्राप्त थी । 
 
 
राज्य  प्रशसान – शिवाजी के द्वारा राज्य  प्रशसान  केंद्रीय स्तर पर ‘ अष्ट प्रधान’ की व्यवस्था की थी , जिसके अंतर्गत आठ मंत्रियो की नियुक्त किया गया था।  जिनमें अनेक प्रकार के पद सम्मिलित है जिसमे प्रथम पेशवा – राजा  मंत्री होता है। 
 
 
 
मंत्री – अष्टप्रधान, सबसे बड़ी ईकाई – छत्रपती, पेशवा – प्रधानमंत्री, गायकवार – अमात्य, सरी- ए- नौवत – सैन्य विभाग, सुमंत – विदेश विभाग, पितनिश –  पत्राचार, वाक्यनाविश – गुप्तचार ( संधि ), पंडित राव – धार्मिक मामला, दंडनायक – न्यायधिस .
 
 
 
 
प्रमुख तिथि और घटनाएं 
19 फ़रवरी 1630 – शिवाजी का जन्म 
 
1646 पुणे के पास तोरण दुर्ग पर अधिकार 
 
1665 -शिवाजी और औरंजेब के साथ पुरन्धर की संधि पर हस्ताक्षर हुआ। 
 
1657 – औरंगजेब  से मिले 
 
1665 – जयसिंह  के साथ (पुरंदर की संधि ) – शिवाजी और जयसिंह के मध्य पुरंदर की संधि हुई जिसके दवारा 
 
1666 – शिवाजी को औरंगजेब आगरा में 1666 ई. में कैद कर  दिया था 
 
1670 -शिवाजी भाग गये ( फिर सूरत लूटे ) 
 
1674 – राज्याभिषेक रायगढ़ में ‘छत्रपति ‘ पदवी मिली’ 
 
1680 -शिवाजी महाराज की मृत्यु।  
 
1659 – बीजापुर के  सुल्तान ने अफजल खां नामक सरदार को वर्ष 1659 में शिवाजी बंदी बनाने के लिए भेजा था, परन्तु शिवा जी ने इसे ही शिविर में जाकर उसकी  हत्या कर दी। 
 
 
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